Internet कैसे चलता है?How does internet run

 

Internet कैसे चलता है?

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इन्टरनेट की स्थापना कब और कैसे हुई?

1969 में जब इंसान ने पहली बार चांद पर कदम रखा था तो USA के रक्षक कार्यालय में Advance Research Foundation  की नियुक्त किया था जिसमें  उन्होंने चार कंप्यूटर को एक साथ जोड़ा था. डाटा को एक दूसरे के साथ  शेयर करने के लिए बाद में उसे एक एजेंसी कि साथ जोड़ा गया ऐसे करके धीरे-धीरे उसका नेटवर्क बढ़ता गया और बाद में आम लोगों के लिए उसे ओपन कर दिया गयाफिर धीरे-धीरे बहुत सी एजेंसी इसके साथ जुड़ते गए लेकिन इंटरनेट का  सबसे अच्छी बात यह है कि इसके ऊपर किसी एक एजेंसी का कंट्रोल नहीं है मतलब इसका कोई एक मालिक नहीं हैभारत की बात करें तो 15 अगस्त 1996 को बीएसएनएल ने इंटरनेट की शुरुआत की थी बाद में सभी प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर ने की  जैसा कि आपको पता है कि जब दो या दो से अधिक डिवाइस को एक साथ जोड़ा जाता है तो उसे इंटरनेट कहते हैं.

इन्टरनेट चलता कैसे है?

दोस्तों आज हम 3 घंटे बिना पानी के भी रह सकते है. और  बिना खाने की भी रह सकते लेकिन 30 मिनट बिना इंटरनेट के रहना बहुत मुश्किल है लेकिन कभी आपने सोचा है कि इन्टरनेट चलता कैसे है तो दोस्तों इंडिया को मिलाकर पूरा वर्ल्ड जो है वह इंटरनेट से Connected  है लेकिन कभी आपने यह नहीं सोचा कि इंटरनेट काम कैसे करता है आपको लगता होगा कि यह  सेटेलाइट से चलता होगा आपको लगता होगा यह नेटवर्क बिछा के रखा है दुनिया में वहां से चलता होगा आपको यह नहीं पता होगा की 99%  इंटरनेट जो है वह चलता है ऑप्टिक फाइबर केबल से लेकिन अब आप बोलोगे कि मै तो मोबाइल से चलाता हूँ  मोबाइल में क्या केबल लगी हुई है देखो जिसभी टॉवर से आपको नेटवर्क आता है वो टावर से लेकर पुरे एक केबल बिछी हुई है जहा तक आपको जाना है. अब मै आपको बिलकुल आसान तरीके से समझाता हूँ. तो आप तक इन्टरनेट पहुचते पहुचते उसे तीन अलग- अलग कंपनियों से गुजरना पड़ता है

1.    टियर-1 कंपनी

2.    टियर-2 कंपनी

3.    टियर-3 कंपनी 

टियर-1 कंपनी

टियर-1 कंपनी यह वह कंपनी होती है जिन्होंने पूरी दुनिया में समुद्र के अंदर अपने केबल्स बिछाके रखें जो इन्टरनेट है वह बिलकुल फ्री होता है .फ्री कैसे होता है. आप अगर आपके घर में हो और आपका ऑफिस 2 किलोमीटर दूर है आपके घर से आपके ऑफिस तक एक लाइन बिछा दो और उस लाइन के जरिये दोनों कंप्यूटर को कनेक्ट कर दो और बोल दो की यह इन्टरनेट है. तो आपका पैसा लगा उस वायर का और उसकी मेंटेनेंस का उसी तरह जो टियर-1 कंपनी होती है उन्होंने क्या किया है पुरे वर्ल्ड में सारे कंट्री के बीच में और सारे  समुद्रों के अंदर से ऑप्टिक फाइबर केबल बिछा दी और सारे एक तरह से कनेक्ट हो गए कंट्री टू कंट्री अब कंट्री से आपको स्टेट में डिवाइड करना है.और स्टेट से सिटी में डिवाइड करना और आपकी सिटी से आप तब उसको पहुंचाना आपके लोकल एरिया तक तो देखिये.

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ऑप्टिक फाइबर, सबमरीन केबल 

इसे कहते हैं ऑप्टिक फाइबर या सबमरीन केबल अब यह केबल जो कंपनी बिछाती वह केबल कुछ इस तरह की दिखती है.बिल्कुल आपके बाल की तरह  रहती है और एक एक केबल के अंदर 100 जी बी पी एस की स्पीड रहती है 100  जीबीपीएस का banwith रहता है हर एक ऑप्टिक फाइबर केबल में जो यह कंपनी जो यह कंपनी बिछाती  है. उसे हम कहते है टियर-1 कंपनी अगर हम इंडिया की बात करे तो टाटा कम्युनिकेशन जो इंडिया में है. अब मै आपको बताता एक साईट है submareen cable.com यहाँ पर आप जायेंगे पूरी दुनिया में कितनी केबल बिछी हुई है सब आपको दिख जाएँगी पूरा इन्टरनेट इन्ही केबल पर चल रहा है.अब यह केबल जिन्होंने बिछाया उन्हें कहते है टियर -1 कंपनी जिन्होंने अपने पैसे से अपने इन्वेस्टमेंट से यह केबल बिछा दी.

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अब अगर हम इंडिया की बात करें तो देखिए यहां पर हमारा इंडिया आता है और हमारे इंडिया में जो केवल हैं वह देखिए कहां कहां बिजी है पहली तो उसकी इंडिया में हमारी मुंबई में है

इसका लैंडिंग पॉइंट अगर पुरे इंडिया में हमारा oprater जिओ एयरटेल वोडाफोन इन्होने इनलोगों ने अपना टावर लगा के रखा अपना सारा सेटअप जमा के रखा है और पूरा infrastructure बना के रखा है अब अगर आप इंडिया से कोई भी साईट विजिट करोगे जिनके सर्वर इंडिया के बाहर है तो वह लैंडिंग पॉइंट से निकलेगा उनकी केबल्स के थ्रू आपका पूरा डाटा ट्राफिक वह चला जाएगा उस सरवर तक जिस भी लोकेशन में है तो सबसे ज्यादा जो ट्राफिक जाता है वह जाता है मुंबई से तो यहां पर देखिए मुंबई में बहुत सारी केबल्स connected  है.उसके बाद  चेन्नई में भी कनेक्टेड है चेन्नई में भी केबल कनेक्ट है जो आपके राइट साइड में कंट्री है उसके बाद आप और देखेंगे तो इतने सारे लैंडिंग कोचिंग में है तो इतने सारे लैंडिंग पॉइंट से ही आपका डाटा निकलता है कोई सेटेलाइट से चीजे नही चलती है रिलायंस जिओ एयरटेल वोडाफोन, ये लेके आपका डाटा मुंबई से  निकाल देगा कोचिंग से निकाल देगा जहा पास जिसे सर्वर है . अब अगर हम बात करे रिलायंस जिओ की रिलायंस जिओ ने अपनी खुद की submareen केबल बिछा दि है एशिया अफ्रीका और यूरोप के बीच में  इसमें इनके पास 40 टेराबाइट की कैपेसिटी मिल गई है इसलिए रिलायंस जिओ आपको सस्ते दामो में नेट दे देता है क्योंकि एक बार का उसका इन्वेस्टमेंट हो चुका है और अगर एशिया अफ्रीका और यूरोप की कंट्री में जाते हैं आपका ट्राफिक लेकर अगर आप इन कंट्री से  वेबसाइट विजिट करते है तो ऑटोमेटिक अली वह उनकी केबल से डाटा निकाल देते हैं उनका कोई पैसा नहीं लगता है .अब देखो जो टियर-1 कंपनी है इन्होने ने तो अपना बिछा दिया इनका कोई पैसा नही लगता एक दूसरे से इन्होने पूरा वर्ल्ड को इन्टरनेट से connect कर दिया ताकि एक इंटरनेट की शुरुआत हो गई इतनी सारी केबल बिछ गई अब होता क्या है कि यह केबल टूटती है फूटती है क्यों कि यह समुन्द्र के अन्दर है 25 साल से ज्यादा इनकी लाइफ नही रहती  या किसी शार्क ने उसको खा लिया या कुछ हो गया टूट गई ब्रेक हो गई तो उसको हमको बैकअप चाहिए तो बैकअप के लिए बहुत सारी केबल ये लोग बिछा के  रखते हैं  और मेंटेनेंस भी करते हैं इनके पास से कोई पैसा नहीं लगता है इंटरनेट पूरा फ्री है. बस इनको connect करने का पैसा लगा है.

टियर -2  कंपनी

टियर -2  कंपनी अब जो टियर -2  कंपनी  होती है वह बोलती है अब आप इंडिया तक तो ले आये सारी चीजे अब आप हमको देदो ताकि हम इंडिया से अपना सारा सेटअप जमा ले  और हम लोगों से पैसा ले और आपको थोड़ा बहुत पैसा दे दे तो per GB के हिसाब से इनलोगों को  पैसा मिल जाता है टियर-1 कंपनी को और automaticaly टियर -2 कंपनी जितने  में भी लेती है per GB और उससे ज्यादा में हम  तक पहुंचाती है. और हम तक आते आते तो टियर -3 कंपनी रह जाती है जो बिलकुल लोकल में चलती है ticona होगया Hatyway हो गया तो टियर -2 वाले टियर -1 से खरीदते है तो घुमा फिरा के सारी चीजें फ्री है बस यह सेटअप Cost  बिछाने  की कॉस्ट है.

टियर -3  कंपनी

टियर-3 कंपनी यह वो कंपनी होती है जो हम तक इन्टरनेट पहुचाती है. अब हम  रिलायंस जिओ वोडाफोन एयरटेल कि हम बात करें तो यह टियर-3 कंपनी है इन लोगों ने भी अपने टावर लगाए हैं अपने केबल्स बिछाई है .रिलायंस जिओ 4g Connectivity कैसे ला पाया क्योंकि वह 5 साल से अपना काम कर रहा था ऑप्टिक  फाइबर केबल के ऊपर  इंडिया के अंदर बिछाने के लिए इंडिया के बाहर तो पहले से ही टियर -1 कंपनी ने बिछा के रखा है अब इंडिया के अन्दर उसने आप्टिक फाइबर बिछाई जिसकी वजह से आपको अच्छी खासी स्पीड  आ जाती है.

इन्टरनेट काम कैसे करता है?

अब मानलो रिलायंस जिओ ने आपके एरिया में एक  टावर लगाया और वहा पर 100 MBps का bandwith है . अब वह 100 MBps आपके एरिया में जितने भी मोबाइल होंगे सब यूज कर रहे होगे अब 20-20 के हिसाब से काउंट करे तो पांच लोग Use कर पाएंगे 100 MBps इस हिसाब से उनके हर टावर में कुछ न कुछ bandwith है उनके वायर में वो वायर को वो और डिस्ट्रीब्यूट करते है. अगर आपके एरिया में बहुत लोग रहते है और सब जिओ Use करते है तो आपको स्पीड कम मिलेगी क्यों कि वो उन्ही के टावर में bandwith फिक्स है 100 MBps या 1GBps उसी में उनको devide कर के देना है

इस लिए होता क्या है की रात में ज्यादा लोग Use नही करते तो स्पीड अच्छी आ जाती है अगर दिन में यूज करते हैं बहुत लोग तो स्पीड कम आती क्योंकि वह डिसटीब्यूट हो जाती है घुमा फिरा कर उनको पहुंचाना तो आपका डेटा ट्रैफ़िक यहांसे ही है इनकी वायर  से ही है अब एक बात और मैं आपको बताऊं कि जैसे इंडिया के इंडिया में अब देखो आप यहां पर तो बोलोगे मान लो अपने इंडिया से विजिट किया google.com गूगल का सर्वे इंडिया में तो नहीं है बाहर है  तो ट्राफिक यहां के Throughनिकल जाएगा बाहर तक लेकिन आप इंडिया के इंडिया में use करते हैं flipkart.com amazone.com तो बोलते यह है की अगर आपकी इंडियन Audianc है और आप अगर वेबसाइट बना रहे हो तो आप इंडिया का सर्वर लो ताकि आपको Submareen Cable के through इतना घूमना न पड़े इंडिया का इंडिया में ही पूरा ट्रैफिक घुमा दे और आपको जल्दी से connectivity मिल जाये तो आप इंडिया to इंडिया connect करते है किसी सर्वर को filipkart को amazone को इन सबने इंडिया में बेंगलुरु में सर्वर बनाकर रखें तो automaticali आप  जिस भी सिटी से होंगे ऑटोमेटिक अली बेंगलुरु वाले सर्वर  में कनेक्ट हो जाओगे तो यह सबमरीन तक आपका डाटा गया ही नहीं अगर आप प्रोक्सी यूज करोगे तो प्रॉक्सी पहले आपको लेके जाएगी USA फिर USA लेकर आएगी इंडिया तो बोलते है कि प्रोक्सी में स्पीड कम हो जाती है. तो देखो इंडिया में एक निक्सी बनाया हुआ है. Nuetral Internet Exchange  इसमें क्या है कि जो इंडिया के सर्वर है. इंडिया के इंडिया में जितने oprater है जितने भी ISP इन्टनेट सर्विस प्रोवाइडर इन सबको मिलाकर एक चीज बना दी गई निक्सी करके अब इसमें होगा यह कि इंडिया के इंडिया में अगर ट्रैफिक घुमाना है तो क्यों हम बाहर की कंट्री है उसको कनेक्ट करें बाहर की सबमरीन  के पास  में उसका ट्रैफिक ले जाए इंडिया की इंडिया में रखेंगे तो हमारी सिक्योरिटी बढ़ जाएगी प्राइवेसी बढ़ जाएगी आधार कार्ड का डिटेल ले लो आधार कार्ड का डेटा  अगर आप इंडिया के बाहर में रखोगे तो ऑटोमेटिक सबमरीन केबल से जाएगा तो बाहर की कंट्री के oprater  लोगों को भी पता चल जाएगा कि क्या जा रहा है तो आधार कार्ड को प्राइवेट रखने के लिए और  बहुत सारी चीजें  चीजे प्राइवेट रखने के लिए इंडिया का  इंडिया में ही सर्वर बनाते है. इंडिया में ही हम लोगो ने छोटे छोटे सब जिनते ISP use हो रहे है.

internet traffic location
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टियर -2 ,टियर -3 इन सब को जोड़ के NIXI करके एक चीज बना दी और इंडिया का इंडिया में ही कुछ विजिट करना चाहेगा तो उसे केबल के through  यहां पर आप आएंगे ना तो यहां पर यह दिखाता है देखो कितना एक्सचेंज डाटा जाता है तो देखो यहां पर बकायदा बताएगा आज इस टाइम पर मुंबई से कितना जीबी का डाटा जा रहा है तो देखो मुंबई का ट्रैफिक सबसे पूरे इंडिया का ट्रैफिक मुंबई के through जाता है 80 %से 90% ट्रैफिक जो भी है मुंबई की सबमरीन केबल से जाता है .

यहां पर आपको बताएगा बिल्कुल पर डे के हिसाब से की मुंबई से  कितने जीबी डाटा जा रहा है.और रात को डाटा कम जाता है क्योंकि इंडियन लोग सोते हैं रात में तो ज्यादा यूज़ नहीं होता डाटा जैसे सुबह होती है ऑफिस स्टार्ट होते हैं चीजें स्टार्ट होती तो देखो वापस से ट्रैफिक जाने लगता है यहां पर आप आकर देख सकते हो आराम से कि पूरे मुंबई में जो पूरा डाटा जा रहा है सारे आईएसपी मिलाकर कितना जा रहा है ऐसे दिल्ली नोएडा का भी देख सकते हो.

इन्टरनेट क्या है जानने के लिए यहाँ क्लिक करे .....

Conclusion

मुझे आशा है कि आपको Internet कैसे चलता है. के बारे में पूरी तरह से जानकारी मिल गयी होगी अगर आपके मन में कोई आशंका या Doubts है . या आपको लगता है इसमें कोई सुधार होना चाहिए तो आप बे झिझक मुझे Comment कर सकते हो मै उसे जरूर गंभीरता से लूँगा आपके इन्ही विचारो से हमें कुछ सीखने तथा सुधारने का मौका मिलेगा.

धन्यवाद/





 


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